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Showing posts from June, 2026

डायरी का एक अंश

बस कुछ दिन और फिर हमारी भी छुट्टियां लग जाएंगी, ये सोचकर मैं मन ही मन कितना खुश हो रहा था, तभी लंच का टाइम हो गया। सभी क्लास के बच्चे बाहर आ गए थे। हमारे पास में ही एक ही लाइन में तीन क्लासे थीं और क्लास के सामने दो गहरे पूल बने हुए थे, जिनमें मेरे जैसा 5.8 फीट का इंसान तो पूरी तरह से डूब सकता था। दोनों पूलों के बीच दूसरी तरफ जाने का रास्ता था और उस तरफ भी वैसे ही तीन क्लासे थीं। ये सब स्कूल के पीछे का एक आंगन था और प्रिंसिपल जी का रूम आगे की ओर था। हमारी भी लंच करने की तैयारी थी, लेकिन आज प्रिंसिपल सर ने कहा था कि आज वो लंच में आएंगे, उन्हें हमें भविष्य के बारे में हमारा मार्गदर्शन करना था। मैं पीछे से दो पंक्ति आगे और आगे से तीन पंक्तियों के पीछे बैठा हुआ था। कक्षा में दो गेट, एक आगे और एक पीछे तथा दोनों तरफ दो खिड़कियां बनी हुई थीं। मेरी सीट खिड़की के पास ही थी तो मैं बाहर का दृश्य नहीं देख सकता था, किंतु जब भी बाहर से चिल्लाने की आवाजें आती या लगता कि बाहर देखना चाहिए तो अपनी सीट से उठकर, आगे की ओर झुककर देख लिया करता था। अब कुछ ही समय बाद सर भी आ गए। सफेद रंग की प्लेन ...

प्रेम, वासना और मेरे मन की बनाई दुनिया

पता नहीं क्यों, लेकिन आज भी मुझे इंतज़ार रहता है। मैंने कितनी ही बार कोशिश की कि इन सब चीज़ों से पीछा छुड़ा लूँ। हर बार खुद से कहा कि अब नहीं सोचूँगा, अब किसी के बारे में इतना नहीं उलझूँगा। लेकिन फिर भी मैं वापस आकर उसी जगह फँस जाता हूँ। कभी-कभी लगता है कि क्या ये सब प्रकृति (nature) खुद तय कर रही है? या फिर मेरा मन और मेरा हृदय मुझे नियंत्रित (control) कर रहे हैं? मैं हर बार सोचता हूँ कि मुझे ये सब नहीं करना, किसी के बारे में इतना नहीं सोचना, लेकिन फिर अनजाने में वही करने लगता हूँ जो नहीं करना चाहता। आप शायद सोच रहे होंगे कि मैं किस बात की बात कर रहा हूँ। मैं बात कर रहा हूँ प्रेम करने की। किसी को अपना दिल दे देने की। अपनी आत्मा तक किसी को समर्पित कर देने की। लेकिन समय के साथ मुझे समझ आया कि शायद मैं प्रेम से ज़्यादा अपनी ही बनाई हुई कहानियों से प्रेम करता था। प्रेम की पहली अवस्था – जब सिर्फ दिल काम करता है कितना अजीब होता है न? हम हमेशा उस इंसान के पीछे पागल हो जाते हैं जिसे हम चाहते हैं। उसके लिए सब कुछ करने को तैयार हो जाते हैं। उस वक़्त लगता है कि अगर यह इंसान मिल गया,...

"Love or Lust? Why We End Up Hating What We Once Loved"

I don’t know why, but even today, I find myself waiting. I have tried so many times to break free from all of this. Every time, I told myself that I wouldn’t think about it anymore—that I wouldn’t obsess over someone like this again. Yet, I always find myself trapped in that same place. Sometimes I wonder, is nature itself deciding all this? Or are my mind and heart controlling me? I try hard not to do this, not to think so much about someone, but then, unknowingly, I start doing exactly what I don’t want to do. You might be wondering what I’m talking about. I am talking about falling in love. Giving your heart to someone. Surrendering your very soul to another. But over time, I realized that perhaps I wasn’t in love with them as much as I was in love with the stories I had created in my own mind. #The First Stage of Love – When Only the Heart Rules How strange is it? We go crazy over the person we want. We become ready to do anything for them. At that moment, it feels like...

एक ट्रेन की सीट और अहिंसा का अर्थ

((वास्तविक जीवन के अनुभवों पर आधारित) रक्षाबंधन के अगले दिन की शाम थी। रविवार होने के कारण भीड़ सामान्य दिनों से कहीं अधिक थी। मैं अपने शहर से घर लौटने के लिए लोकल ट्रेन में बैठा था। ट्रेन अभी स्टेशन पर ही खड़ी थी और धीरे-धीरे यात्रियों से भर रही थी। मेरे सामने वाली सीट पर एक परिवार बैठा था। दो महिलाएँ मेरे पास वाली सीट पर थीं और एक महिला अपने लगभग आठ वर्ष के बेटे के साथ सामने बैठी थी। उनके परिवार के कुछ अन्य सदस्य भी आसपास ही बैठे हुए थे। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, ट्रेन पूरी तरह भर गई। सामने वाली सीट पर बच्चे के कारण थोड़ी जगह बची हुई थी जहाँ एक व्यक्ति आराम से बैठ सकता था। कई यात्री आकर पूछते कि क्या थोड़ा बैठने की जगह मिल सकती है, लेकिन हर बार जवाब मिलता, "बच्चे की तबीयत ठीक नहीं है।" यह सुनकर मुझे थोड़ा अजीब लगा, लेकिन मैं केवल एक दर्शक था। अगले स्टेशन पर कुछ लोग उतरे और उससे अधिक लोग चढ़ गए। तभी एक महिला अपने लगभग बारह वर्ष की बेटी और आठ वर्ष के बेटे के साथ हमारे डिब्बे में आई। भीड़ के कारण वे वहीं खड़े हो गए जहाँ हम बैठे थे। महिला ने विनम्रता से बैठने की जगह ...

A Train Seat and the Meaning of Non-Violence

(Bassed on real life experience) It was the evening after Raksha Bandhan(an Indian festival). Since it was also a Sunday, the local train was unusually crowded. I was traveling from the city back to my hometown and had managed to find a seat. Across from me sat a family. Two women were seated beside me, while another woman sat opposite with her young son, who looked about eight years old. A few other members of the same family were sitting nearby in the coach. As more passengers boarded, the train became packed. Because the child was small, there was enough space on the seat for one more person to sit comfortably. Many passengers approached and politely asked whether the seat was available. Each time, the family gave the same response: "The boy is not feeling well." I found the excuse difficult to believe, but as a silent observer, there was little I could do. At the next station, some passengers got off and many more boarded. Among them was a woman traveling with...

Aravali Range: The World's Oldest Mountain System and Its Hidden Secrets

The World's Oldest Mountain System and Its Hidden Secrets Description : Discover the fascinating history, geology, biodiversity, and hidden secrets of the Aravali Range, one of the world's oldest mountain systems stretching across northwestern India. Introduction The Aravali Range is one of the most remarkable geological formations on Earth. Often regarded as the world's oldest mountain system, the Aravali hills have witnessed millions of years of Earth's history. Stretching across northwestern India, these ancient mountains have played a crucial role in shaping the geography, climate, culture, and biodiversity of the region. From ancient civilizations to modern conservation efforts, the Aravali Range continues to be a source of fascination for historians, geologists, environmentalists, and travelers alike. Where Is the Aravali Range Located? The Aravali Range extends for approximately 670 kilometers across the Indian states of Gujarat, Rajasthan, Haryana, and Delhi. Th...

"Chhattisgarh ke 10,000 Saal Purane Shailchitra Mein 'Rohila Log' Ka Rahasya"

भारत की धरती प्राचीन सभ्यताओं, लोककथाओं और रहस्यमयी पुरातात्विक धरोहरों से भरी हुई है। हाल ही में छत्तीसगढ़ के गरियाबंद क्षेत्र में मिले लगभग दस हजार वर्ष पुराने शैलचित्रों ने इतिहासकारों और शोधकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। इन चित्रों में मानव जैसी आकृतियाँ दिखाई देती हैं, जिनका सिर असामान्य रूप से बड़ा है और चेहरे के स्पष्ट अंग नहीं बने हुए हैं। यही विशेषता इन्हें सामान्य शैलचित्रों से अलग बनाती है। क्या हैं ये शैलचित्र? शैलचित्र (Rock Paintings) प्राचीन मानव द्वारा चट्टानों पर बनाए गए चित्र होते हैं। ये चित्र उस समय के लोगों के जीवन, संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक गतिविधियों की झलक प्रस्तुत करते हैं। गरियाबंद में मिले इन चित्रों की आयु लगभग 10,000 वर्ष मानी जा रही है, जो इन्हें मानव इतिहास की अत्यंत महत्वपूर्ण धरोहर बनाती है। ‘रोहिला लोग’ कौन थे? स्थानीय जनजातीय लोककथाओं में ‘रोहिला लोग’ नामक छोटे कद के रहस्यमयी प्राणियों का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि ये प्राणी गोलाकार उड़न यानों में आसमान से उतरते थे और लोगों के बीच दिखाई देते थे। शैलचित्रों में ब...

नाम नहीं, पहचान है: क्या हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को खो रहे हैं?

लेखक: Lalit Kumar Rathor हाल ही में समाचार पत्र में छपी एक खबर ने मेरा ध्यान अपनी ओर खींचा। यह खबर झुंझुनूं जिले के 'इस्लामपुर' गाँव के बारे में है, जहाँ के लोग अपने गाँव का नाम बदलने की चर्चा से बेहद चिंतित और दुखी हैं। यह सिर्फ एक नाम बदलने का मुद्दा नहीं है, बल्कि एक 400 साल पुरानी सांस्कृतिक पहचान और इतिहास को बचाने की लड़ाई है। क्यों महत्वपूर्ण है यह नाम? इस्लामपुर के लोग इसे केवल एक सरकारी नाम नहीं, बल्कि अपनी विरासत मानते हैं। गाँव वालों का मानना है कि: इतिहास का प्रतीक: यह गाँव 16वीं सदी में स्थापित हुआ था। यहाँ के लोग खुद को महाराणा प्रताप के वीर सेनापति 'हकीम खां सूरी' का वंशज मानते हैं। देशभक्ति की कहानी: इस गाँव की गलियों में 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध के नायकों, जैसे कर्नल अब्दुल रसूल खान और उनके परिवार की वीरता की अनकही कहानियाँ बसी हैं। सांप्रदायिक सौहार्द: इस गाँव में हिंदू-मुस्लिम सद्भाव की एक अनूठी मिसाल है, जहाँ मस्जिद के साथ मंदिर भी स्थापित है। क्या नाम बदलने से समस्याओं का समाधान होगा? अक्सर देखा गया है कि प्रशासनिक स्तर पर गाँव या ...